अनुगुँज 21 :: एक दो अपने भी जोक्स टीका लो
अपन ने कभी अनुगुँज मे हिस्सा लिया ही नही. 
कहाँ से लें, विषय ही औकात के बाहर के होते थे. ये तो अभी भला हो रवि भाईसाहेब का कि औकात वाली बात कह दी और मैरे भाईसाब बोले तु भी लिख दे. तो लो ये चार मैरे चुटकुले भी टीका लो.
- एक बार मैरे सागर भाईसा साइबर कैफे में बैठे बाहर सडक की ओर देख रहे थे. अचानक उन्हे सामने से आता एक सुमो पहलवान दिखा. इत्ता बडा आदमी तो उन्होने जिन्दगी में कभी देखा ही नही था. जैसे ही वो पास आया, भाईसा पुछ बैठे, “भाई तु कौन?” सुमो पहलवान बोला ,”सुमो पहलवान” और चला गया.
उसके पीछे पीछे सुमो पहलवान की बीवी निकली. कद में थोडी छोटी थी पर माशाअल्ला वो भी खाते पीते घर की हट्टी कट्टी थी. भाइसा तो चौंक गए, बोले “अरे तु कौन?” वो बोली,”सुमो पहलवान” और चली गई.
इतने उनका बच्चा पीछे पीछे आया. कद में तो छोटा पर था सांड जैसा.
भाईसा बोले,’अरे भैया तु कौन?” वो बोला,”सुमो पहलवान” और चला गया.
भाईसा हैरत मे तब पड गए जब उनके पीछे पीछे डेढ फुटिया बच्चा निकला. थोडा मनचला था. भाईसा को ठोकर देता निकल गया. भाईसा धडाम से गिरे. चीख निकली और भाईसा बोले,”हे भगवान, अरे बाबा तु कौन?” बच्चा खी खी करता बोला,”सुमो पहलवान. और आप कौन?”
भाईसा कराहते हुए बोले,”हुँ तो मै भी सुमो पहलवान. आजकल थोडा बिमार चल रहा हुँ.” - डॉ. सुनिल के पास एक आदमी भागा भागा आया. बोला,” डोकटर साहेब, देखो मेरी बीवी को क्या हो गया है. कब से चिल्लम चिल्ली कर रही है.”
डॉक्टर बोले,”कोई गल्ल नहीं, अन्दर इनकी जाँच करते हैं” थोडी देर बाद डॉक्टर बाहर आए और बोले,”नर्स जल्दी से पेचकश दो”. आदमी डर गया – ओये यह क्या?
थोडी देर बाद डॉक्टर साहेब फिर बाहर आए और बोले,”धत्त तेरे कि पत्ता नही कै हो गया है, नर्स जल्दी से हथौडा दो.” अब तो बेचारा आदमी बुरी तरह डर गया. बोला,”मालिक मेरी बीवी को हुआ क्या है?”
डॉक्टर साहेब बोले,” अरे बापु चेक तो करने दो. यहाँ तो मेरी बेग ही नही खुल रही है.” - मेरा दोस्त रवि कामदार एक शुक्रवार को अपनी नई नवेली गर्लफ्रेंड को लेकर एक ज्वैलर के शोरूम में गया और कहा,”भईया, मेरी स्वीट हार्ट के लिए एक सुन्दर सी अंगुठी दिखाओ.”
सेल्समेन ने एक अंगुठी निकाली और कहा,”ये देखिए सर, कितनी सुन्दर है. सिर्फ 5000 रूपये.” रवि बोला, ”बस! अरे यार थोडे ढंग की दिखाओ”
सेल्समेन खुश हो गया. एक और अंगुठी निकाली और बोला,”ये देखिए सर. एकदम आपके क्लास की. किमंत 25000 रूपये.” रवि बोला,”बस यह ठीक है. ये लिजीए 25000 का चेक. आप सोमवार को बेंक में एकबार चेक करवा लेना. हम अंगुठी फिर ले जाएंगे.”
सोमवार को सेल्समेन ने रवि को फोन किया,”सरजी, आपकी बेंक में तो बेलेंस ही नही है!”
रवि बोला, ”कोई बात नहीं, लेकिन मैरा विकेंड बडा मजेदार गुजरा” - एकबार मैं, अमित और संजयभाई दुनिया से कल्टी हो लिए और पहुँच गए स्वर्ग नरक जंक्शन पर. वहाँ बहीखाता लिए चित्रगुप्त भिड गया.
चित्रगुप्त,”चलो अपना अपना नाम बोलो”
अमित,”नही बताएंगे. पैचान कौन?”
चित्रगुप्त,”अच्छा ये बात है, तो बताओ वो कौन सी प्रोग्रामिंग लेंग्वेज है जो एक पेय भी है?” अमित हँसा और बोला,”लो कर लो गल्ल. ए तो जावा है.”
चित्रगुप्त बोला,”वाह वाह आप तो अमित गुप्ता हैं, आओ आओ. अच्छा अब आप बताओ सिंगापुर पहले क्या था?”
अब संजयभाई बोले,”भईया, सिँहपुर था”.
चित्रगुप्त झट पहचान गया. बोला,”अहोभाग्य संजयभाई आओ आओ.”
अब मै बचा. शक्ल से ही झंडु बाम लगता हुँ.
चित्रगुप्त बोला,”तेरे लिए इजी लेता हुँ. बोल भारत के प्रधानमंत्री कौन.”
मैं बोखलाया, सर खुजाया, मुहँ बनाया, गाल सहलाया और बोला,”सरदारजी”
चित्रगुप्त: ”ह्म्म.. पंकज बेंगाणी. आजा इधर साइड में. नर्क की लाइन में लग जा”

2 Comments:
बहुत बढ़िया, जबरदस्ती हँसना पड़ा,
नहीं हँसे तो कल मेरे चिठ्ठे पर टिप्पणी कौन करेगा?
शीर्षक सुधार लेवें "टीका" नहीं टिका सही शब्द है।
बढ़िया धमाकेदार जोक्स हैं - विज्ञापनी पंचलाइन लिए हुए :)
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