एक मज़ेदार वाकया
कल कुछ युँ हुआ।
मैं एक क्लाइंट से मिलकर वापस ऑफिस लौट रहा था। जैसे ही मैने कार को मुख्य सडक पर घुमाया मैने देखा कि मेरे ठीक आगे स्कूटर पर एक युवती जा रही है, जिसके स्कुटर के पीछे एक बच्चा बैठा हुआ है जिसका चेहरा मेरी तरफ है, यानि कि वो उल्टा बैठा हुआ है।
मुझे थोडी शरारत सुझी तो मैने अपना नाक सिकोड कर उसे चिढाया, पहले तो उसने मुँह फेर लिया फिर थोडी देर बाद मुस्कुराता हुआ मेरी तरफ देखने लगा। मैने अब जीभ निकाल कर चिढाया, उसने भी प्रतिउत्तर दिया। मुझे हँसी आई, मैने अब चेहरे को इधर उधर मोडकर चिढाना शुरू किया, उसने भी किया।
अजीब संयोग यह था कि मुझे जिधर मुडना होता था, वो लडकी भी मेरे आगे आगे ठीक उसी रस्ते पर जाती थी।
अंत में जब ऑफिस थोडी ही दूर थी तब मैंने चिढाना बन्द कर दिया क्योंकि थक गया था। लडका अभी भी मुझे हंसते हुए देख रहा था और उकसा रहा था। मैने नजरें हटाकर इधर उधर देखा तो अचानक ही मेरा ध्यान लडकी के स्कूटर के रीयर मिरर पर गया। वो लडकी मुझे ही देख रही थी और बुरी तरह आग बबुला हो रही थी। उसे शायद लग रहा था कि मै उसे ईशारे कर रहा हुँ।
मेरी सिट्टी पिट्टी गुम हो गई। मैने उसे ओवरटेक कर आगे जाना चाहा पर उसने अपने स्कूटर की रफ्तार काफी बढा ली थी। लेकिन अभी भी हम दोनों के रास्ते एक ही थे। वो जिधर मुडे उधर मैं भी मुडुं। मैने सोचा है प्रभु इसे ऑफिस वाली सोसाईटी में ना जाना हो तो अच्छा है, नहीं तो जूते पडने वाले हैं।
लेकिन गनिमत है कि ऑफिस आने से ठीक पहले वो तेजी से आगे निकल गई, और मेरी सांस में सांस आई।
बोधपाठ: वाहन चलाते समय बच्चों को चिढाना हानिकारक हो सकता है।

11 Comments:
क्यों बहाने बना रहे हो भाई? सब को मालूम है कि बहुत रसिया स्वभाव के हो। :-)
बोध पाठ सही है , अमल में लाने लायक ।
:-)
इस पोस्ट को आपके घर पर भेजा जा रहा है, बस इत्ता किया जा रहा है, इस पोस्ट मे जहाँ बच्चा है वहाँ पर एक २० साल की लड़की को बिठाया जा रहा है।
अब घर मे क्या महासंग्राम हुआ, इसके बारे मे जरुर लिखना।
बोधपाठ: ऐसे दोस्त हो तो दु्श्मनो की क्या जरुरत।
नई कहावत "बच्चा खिलाने के बहाने छिछोराई" पन्कज बैगानी की नई हरकतें.
बोध पाठ का ध्यान रखा जायेगा, मगर दाल में कहीं कुछ काला जरुर है. :)
क्यों झूठ बोल लपेट रहे हो भईये, कहीं ऐसा तो नहीं कि पीछे कोई कन्या हो जिसको छेड़ रहे थे? या फ़िर वाकई में स्कूटर चलाती उस कन्या को छेड़ रहे थे?
दिल्ली में ऐसी हरकतें करते मैंने देखा है, इसलिए आप पर यकीन नहीं रहा कि बच्चे से मजे लेने जैसी कोई शरीफ़ाना हरकत कर रहे होगे!! ;) :P
शुक्रिया उसताद
ऐसे ही नुखसे बताते रहें - आज ही तजर्बा नम्बर वन शूर करता हूं ;)
ये तो बताने का अंदाज़ है. अब अपने मन की बात कहो- आगे क्यों नहीं गये? क्या डर गये? जो डर गया सो मर गया.
बच्चे के कंधे पर रखकर बंदूक चला रहे हों मेरा मतलब है तीर चला रहे हो......तो फिर तय रहा कल भी उसी रास्ते पर निकल रहे हो ना।
वाह पंकज भाई
चैट के दौरान मुझे कहा कि आज एक लड़की को छेड़ते समय ( लाईन मारते समय) उससे पिटते बचे, अब यहाँ सारा किस्सा बच्चे के नाम कर सबसे सहानूभूति प्राप्त करना चाहते सो, मैने घर फ़ोन कर दिया है, घर पहूँचो तो......
हे भगवान,
शरीफों का तो जमाना ही नही रहा।
वैसे चोर को सारी दुनिया चोर ही नज़र आती है, क्या ख्याल है? ;-)
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