राम नाम सत्य है?
मनु शर्मा का गुनाह (हालाँकि अभी न्यायालय में साबित नहीं हुआ है) किसी से छिपा नहीं है। आज सब जानते हैं कि जेसिका लाल की हत्या किन हाथों से हुई थी? कुछ दिनों पहले स्टार न्यूज पर स्टिंग ऑपरेशन में भी तीनों मुख्य गवाहों के बिकने की बात सरे आम उजागर हो गई थी। और प्रियदर्शनी मट्टु कांड के आरोपी संतोष सिंह को मौत की सजा सुना दिए जाने के बाद तो सब की निगाहें जेसिका लाल केस पर टिक गई थी। शायद जेसिका के घर वालों को न्याय की धुन्धली होती किरण फिर से दिखाई देने लगी होगी... लेकिन तभी रामबाबु आ गए... और....
हालाँकि केस अभी भी चल रहा है और शायद लम्बे काल तक चलने वाला है.. लेकिन राम जेठमलानी का असर दिखने लगा है। राम भारत के सबसे उम्दा क्रिमिनल वकील माने जाते हैं और सही माने जाते हैं। उनके द्वारा मनु की पैरवी किए जाने से इस केस पर व्यापक असर पडेगा इसमें कोई शक नहीं।
इससे पहले राम जेठमलानी ने इन्दिरा के हत्यारों की पैरवी की थी, शेर दलाल हर्षद मेहता की पैरवी की थी, और हाल ही में संसद पर हमले के आरोपीयों की भी पैरवी की थी। उसमें से प्रोफेसर गिलानी बरी भी हो गए। कहा जाता है कि इस केस के लिए राम ने कोई फीस भी नही ली।
खैर राम वस्तुतः पेशेवर वकील हैं, और वे किसी का भी केस लडने को पुरी तरह स्वतंत्र हैं। लेकिन क्या यह सच है कि उनके इस तरह के केस लडने से न्याय की आशा धुमिल सी होने लग जाती है?
और फिर उनको दोष देना भी बेमानी होगा। सब जानते हैं हमारी जांच एजेंसीयों का काम कितना निम्न स्तरीय होता है। गिलानी को सबुतों के अभाव में छोडा गया था और मनु केस में भी पुलिस ने भारी गलतियाँ की.. या फिर युँ कहुँ पुलिस से करवाई गई।
जो भी हो जेसिका की आत्मा जरूर पिडित होती होगी और शायद होती रहेगी।

4 Comments:
पंकज जी, यह अत्यन्त ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि राम जैठमलानी जैसा वकील एक हत्यारे की पैरवी कर रहा है। वैसे सच और झूठ की अपनी अपनी टीम होती है - और राम जैठमलानी नें बता दिया है कि वे किस टीम के हैं।
कोई कितना भी प्रोफेशनल हो, जन भावनाओं की उपेक्षा नहीं की जानी चाहिये। मनु शर्मा के खिलाफ मीडिया के साथ साथ आम लोगों के मन में भी रोष है क्योंकि उसने अपने राजनैतिक प्रभाव का इस्तेमाल करने की कोशिश की है। राम जेठमलानी एक बड़बोला और जिद्दी इनसान है जो यह सब करके अपनी खुद के अहम को पोसता रहता है।
पंकज जी दोष रामजेठमलानी का नहीं
दोष है हमारी न्याय-व्यवस्था और जांच-एजेंसियों का जिनके कारण जेठमलानी जैसे लोग इतने ताकत्वर हो गये हैं
वैसे एक वकील का काम होता है अपने मुवक्किल की पैरवी करना इसलिए उसे दोष देना ठीक नहीं
दुखद स्थिती न्यायपालिका की है. जेठमलानी तो पेशेवर वकील हैं, उन्हें क्या दोष दिया जाये, उनका काम तो अपने मुव्वकिल की पैरवी करना है मगर फैसला तो न्यायपालिका को करना है. जन भावनाओं की कद्र का तो यूँ भी चलन कहां है हमारे देश में.
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