6.2.07

पातालभैरवः >> काली दुनिया का इंट्रोडक्शन

कहते हैं इस जहाँ के बाद एक जहाँ और भी है!

उस जहाँ को जन जन जानता है और पहचानता है, क्योंकि वो एक ऐसी दुनिया है, जो अपने अन्दर कई रहस्यों और रोमांचो को और कई पीडाओं और षडयंत्रो को समेटे बैठी है... वो दुनिया पहले बहुत बडी थी. अब छोटी हो रही है... पर आज भी है और शायद कल भी रहेगी.

मेरी कहानी में यह पातालभैरव: है, वही जो अंग्रेजी में अंडर वर्ल्ड है।

इस दुनिया के पात्रों से मिलिए:

1. अमृतांजन मुदुलियार: साउथ के इस शहंशाह ने तस्करी को गुटखा समझकर अपनाया और इसकी लत के आगे नतमस्तक होकर पाताल तक जा पहुंचा... 60 के दशक में तो इसकी तुती बोलने लगी पर अब आर्थिक सुधारों के आते आते इसकी आर्थिक हालत दयनीय हो गई... और यह महाशय अब खर्चापानी की चिंता छोडकर सिर्फ चर्चा करते हैं।

2. दाऊ इमरीत: इसको बडा "भाई" बनने का शौख था, तो इसको भाईलोग दाऊ कहने लगे... यह दारू को इमरीत (अमृत) कहता है, जो इसका उपनाम बन गया. कभी अमृतांजन का दायां बायां कोई सा हाथ होता था, फिर उससे कन्नी काटकर अपनी अलग चर्चाएँ चलाता है।

3. छोटा साजन: बडा दिलफेंक है तो लोगबाग साजन कहते हैं। माँ बाप के लाड प्यार ने छोटे को बडा नहीं होने दिया. कभी दाऊ का दायाँ बायाँ हुआ करता था, अब अमृतांजन के पीछे लगा है।

4. छोटा वकील: इसने मुन्नाभाई के अमर तरीके से एल.एल.बी. की डिग्री सर्वोच्च अंको के साथ पास की, लेकिन आई.पी.एस. अभी भी इसके लिए "इतनी पिला दे साकी" से ज्यादा कुछ नहीं है. काले कपडे तो मुफीद नहीं आते तो दाऊ के साथ चर्चागिरी किया करता है।

5. लंगडा लवली: लंगडा लवली लंगडा नहीं है और लवली भी नहीं है। इसका नाम पहले करूण था, पर ओमकारा से इंसपायर होकर लंगडा हो गया। ये भाईसाहब इंसपायर होने के शौखिन हैं, कुछ बरस पहले पंडितजी से इंसपायर होकर इसने गान्धीटोपी अपनाई थी, आजकल अपनी गली के कुत्ते से इंसपायर होकर अमृतांजन के आगे पीछे घुमता है।

6. साबु सलीम: ये दुबई रिटर्न है, इसलिए इसका बडा नाम है। दिखने में साबु जैसा तो नहीं है पर साबुन जितना चिकना घडा है, दाऊ के साथ चर्चागिरी उसे मनमाफिक लगती है।

7. चूरणदेवी: कहते हैं अमृतांजन इसे बीहड से उठाकर लाया था, पर रखने की जगह नहीं मिली तो भटकने छोड दिया। पर यह अमृतांजन के पीछे लगी रहती है।

8. टमाटर मक्खन: लोग इसे इस नाम से क्यों पुकारते हैं, वो तो पता नहीं पर इसे टमाटर के सलाद में मक्खन मिलाकर खाना बडा पसन्द है। कभी टाइगर हुआ करता है, पर आजकल मेमना हो गया है तो दाऊ के साथ चर्चागिरी करता है।

ये लोग क्या बातें करते हैं.... अन्दर की बात जल्द ही बाहर आएगी।

(मेरा मोहल्ला और बन्दर सिरीज की अपार सफलता के बाद, :) आपके चहेते (स्वम्भू) लेखक पंकज उर्फ शांतिभाई की नई सिरीज)

7 Comments:

Anonymous Anonymous said...

भईये क्यों सुरेन्द्र मोहन पाठक के पेट पर लात मार रहे हो ? उस बेचारे ने तुम्हारा क्या बिगाडा है ?

5:06 PM, February 06, 2007  
Blogger पंकज बेंगाणी said...

अपनी औकात ही क्या है आशीषभाई कि किसी का कुछ बिगाडें? है कि नहीं..

मै तो सिर्फ मौज ले रहा हुँ (साभार: फुरसतियाजी), आप भी लो... :)

5:37 PM, February 06, 2007  
Blogger Jitendra Chaudhary said...

ह्म्म! दम है
कहानी के शुरु होने का इन्तज़ार है। सिक्वेन्स के लिए, किस 'डॉन' से 'क्लास' ले रहे हो।


मौज के सिलसिले मे:
मौज सिर्फ़ लेने/देने की चीज होती है, इसे बाँटा जाना मुमकिन नही। - आचार्य जीतेन्द्रस्वामी

5:46 PM, February 06, 2007  
Blogger पंकज बेंगाणी said...

कौन डॉन ?

डोन को पकडना तो...

6:25 PM, February 06, 2007  
Blogger अनूप शुक्ल said...

बढ़िया है! हम इंतजार कर रहे हैं!

6:40 PM, February 06, 2007  
Blogger Udan Tashtari said...

पंकज उर्फ में शांतिभाई देखकर ही समझ में आ रहा है कि कोई बड़ा तूफान लेकर आ रहे हो, जिसकी लपेट में काफी बड़ा समुदाय आ जायेगा. :)

इंतजार कर रहे हैं तूफान का, टप्पर के नीचे दुबक कर. अब यह आ जाये तब तूफान आरती गायेंगे, तूफान भगाने को. :) :)

7:49 PM, February 06, 2007  
Blogger ePandit said...

और इन सब का बाप जिसके नाम से दुनिया कांपती है - पंकज उर्फ शांतिभाई :)

बाप रे लगता है गॉडफादर का सिक्वल आ रहा है। वैसे नाम मैं सुझा देता हूँ:

- गॉडफादर:2
- रिटर्न ऑफ गॉडफादर
- गॉडफादर रीलोडेड
- गॉडफादर 2007

या फिर हिन्दी सबटाइटल:
- गॉडफादर की वापसी
- गॉडफादर आया, तबाही लाया
- मेरा नाम गॉडफादर

ह.. अभी इतने ही सूझे, मेरे ख्याल से काम चल जाएगा। :)

10:00 PM, February 07, 2007  

Post a Comment

Subscribe to Post Comments [Atom]

<< Home