7.2.07

नारद मुनि का शाप

मै उल्टी सिधी हरकतें करने में उस्ताद हुँ। इसबार नारदमुनि चपेट में आ गए... सुबह सुबह मैने अपनी तीन दुकानें बन्द कर दी... क्या करें, कुछ में गिराहिकी नहीं थी, कुछ में इंवेस्टमेंट इतना था कि लुटिया डूब गई थी.

खैर पहले यह बता दुँ कि मैने जो तीन दुकाने जो बन्द की वो थी -

1. मैरे कैमरे से : क्या करें साहब, वो इटली वाले अंकल ने ऐसी विलायती दुकान खोल रखी है कि अपने तो गराहक के ही वान्दे हो गए... फिर सिन्धी ताऊ भी फोटु खिंचने लगे हैं तो अपनी तो फोटु खिंच गई.. लगा दिया ताला भाई और क्या करते?

2. कल्पना कक्ष: इसपर एटोटाइज दिखाते थे, अब क्या है सोचा कि जब सुपर मार्केट तरकश खोल ही रखा है तो चिल्लर दुकान क्या चलाना.. तो अब तरकश पर देते हैं मिडिया मंतर और इस दुकान को देते हैं ताला.

3. पाठशाला: हाँ ये पाठशाला सही चीज थी, गराहिकी भी अच्छी थी, लोगबाग ईज्जत भी देते थे. लालाजी हाजिरी भी लगाते थे और मोनिटर भी बने हुए थे. फिर क्या है कि मास्साब इतने पचडो में फंस गए और ऐसी बन्दरगिरी करने लगे कि पाठशाला शिवपालगंज (राग दरबारी) के कोलेज जैसी होने लगी। तभी बिना मुँछ का पर तैवर वाला एक हरियाणवी मास्टर भी आ धमका. तो भैया हम तो गरदन नीची किए खिसक लिए.. और एकठो ताला छोड दिए कि भई लगा दो.


तो भई तीन दुकान बन्द. शांति. अहो आनन्दम आनन्दम.

लेकिन हमरे नारद मुनि तो फोगट में चपेट में आ गए. हमने दुकान बन्द करने कि सुचना तो दी ही नहीं उनको. बिचारे ढुंढते रहे हमको और दुसरी दुकानों तक गए ही नहीं. भई क्षमा चाहते हैं मुनिवर. लगे तो कोई शाप वाप ही दे दो, खुशी खुशी ले लेंगे.

पर आप लोग ऐसी गलती ना करिएगा. दुकान खोलो या बन्द करो, नारद मुनि को सूचित अवश्य करो.

3 Comments:

Blogger Udan Tashtari said...

अच्छा हुआ खुदरा व्यापार से उभर कर अंबानी केटेगरी में सुपर मार्केट में लगे हो, यही भविष्य के लिये उचित है. शुभकामना.

7:04 PM, February 07, 2007  
Blogger ePandit said...

समीरलाल जी सही बोले एलीट पैनल में आ गए आप, आपका भविष्य उज्जवल है। खुदरा मार्केट हम संभालते हैं न। :)

वैसे आपकी पाठशाला बंद होने का बहुत अफसोस है। क्या ये मुमकिन नहीं कि तीन महीने आदि में एक बार एक स्पेशल क्लास लगा ली जाए। इतना वक्त तो निकाला जा सकता है।

11:09 PM, February 07, 2007  
Blogger Pramendra Pratap Singh said...

अच्‍छा निर्णय है, कि जिस ब्‍लाग पर लिखना बन्‍द किया जाये उसकी सूचना नारद जी को दे दी जाये। और तो और जो ब्‍लाग लगभग 6 माह से ज्‍यादा समय से नही लिखे या अपडेट किये गये हो उन्‍हे नारद पर ही एक अलग श्रेणी मे इतिहास के अर्न्‍तगत कर दिया जाये। जिससे नारद जी पर असक्रिय चिठ्ठो की भीड खत्‍म हो सकती है। और अन्‍य उपयोगी चिठ्ठो को समुचित स्‍थान मिल सकेगा।

1:53 PM, February 08, 2007  

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