डॉन को पकडना मुश्किल है, प्रत्यक्षाजी !!
सुबह सुबह उनिन्दा सा मैं जागा. नहीं, पत्नी ने नहीं जगाया, वो ऐसा पाप भला क्यों करेगी? पर मेरे मोबाइल की घंटी अलार्म का कार्य कर रही थी.
आंखे मलते मलते मैने मोबाइल की स्क्रीन देखी.
Chhota Vakil calling....
"आह, छोटा वकील, चलो ठीक है प्रोब्लम छोटी होगी", मैने सोचा और मुस्कुराया. हरा बटन दबाकर घुमतु (मोबाइल) को कान से लगाया.
"अगला एपिसोड कब लिखेगा, बेटी के बाप?"
लिखुंगा यार, फुरसत तो मिलने दे.
अबे, अपने आपको कानपुरिया मत साबित कर, तु लिखेगा तभी तो अपनी दुकान चलेगी. देख कोई उठाकर अन्दर कर दे उससे पहले लिख डाल.
कौन करेगा अन्दर यार? मैने क्या किया है.
हिन्दी में लिखने का गुनाह किया है तेने, देख टाइम खराब चल रहा है, सुबह से उसके तीन फोन आ चुके हैं, चौथा आया तो मैं नहीं बोलुंगा कि कुछ आया था, क्योंकि तु सुनने को जिन्दा नहीं बचेगा.
'पहेली बुझाना बन्द कर वकील', मैं गरजा, साफ साफ बात कर.
देख शांति (पंकजभाई), पुरानी खिलाडी है वो, बडे बडे लोगों का हाथ है उसके उपर, बहुत डेंजरस है, तेरे नाम का वोरंट निकाल चुकी है, पाँच सवाल के जवाब मांगेगी, चुपचाप तेरे को दे देने का बस!
और नहीं दिया तो?
अबे बावळा हो गया क्या, साले जानता नहीं वो क्या है. उठाकर ऐसा पटकेगी कि पानी नहीं मांगेगा तु.
अब नीन्द उडी जा रही थी मेरी. क... कौन.. कौन है वो.
परतिछा!!
ये कैसा नाम है?
नाम का अचार डालेगा तु? अबे खुद भी मरेगा हमें भी ले डुबेगा. वो मेरे को बजाती है, सवालों की फडदी है मेरे पास. बोल दे ना मेरे बाप, जो जी में आए.... पर मेरे को निकाल इस सबसे.. भाई को पता चला तो वाट लगा देगा.
कितने भाई हैं, वकील?
क्या कितने है, एक ही है. क्यों तेरे को पत्ता नहीं क्या?
नारद के पास जा वकील, आजकल हर कोई हर किसी की वाट लगा रहा है!
तुझे क्या खुजली है? तुझे भी वाट लगाकर भाई बनना है क्या.
नहीं अपने तो इंसान ही ठीक हैं. भाई नहीं बनना.
इंसान बनना है तो काइको फालतु के पचडों में चिल्लपों करने का? करने दो जो करता है, तु सुन, शिरीस का नाम सुना है? परतिछा ने उसकु तेरा एंकाउंटर करने को बुलायला है.
एनकाउंटर? सवाल..... सवाल... क्या है वकील, सवाल बोल', अब मुझे पसीना आने लगता है.
हा हा, आ गया ना रास्ते पर, परतिछा बाई और शिरीसबाबु के सारे सवाल बोलता हुँ, तेरे को ज्यास्ती भेजामारी नहीं करने का, शोर्ट आणी सिम्पल जवाब ठोकने का, बरोबर?
बरोबर!!
पेला सवाल, वो पुछ रेली है, जीवन की पहली धमाकेदार वारदात क्या की थी?
यार ये तो बहुत सारी है, कौन सी बोलुं? छोटा था, तब एक बार जोश में आकर
कक्षा का पंखा पुरा मोड कर उल्टा कर दिया था. उसके बाद जो हुआ वो बुरे सपने से भी
बुरा था! बात जिला शिक्षण अधिकारी तक जा पहुंची थी, और मैं सारा दिन बेंच पर खडा
खडा अलग अलग एंगल से मजाक का पात्र बन रहा था.
वाह भीडु, दुजा सवाल, चिट्ठा जगत में भाईचारा , बहनापा सच है या माया है ?
सच है भी और नहीं भी, देख वकील, रिश्ते जो हैं खून के भी होते हैं, भावनाओं
के भी और मतलब के भी. किसी की भावना किसी का मतलब भी हो जाती है। पर एक तरह का भाईचारा तो है ही. बाकि सब हरिईच्छा!
ह्म्म.. बरोबर बोला तु, अब तीसरा, किसी एक चिट्ठाकार से उसकी कौन सी अंतरंग बात जानना चाहेंगे ?
हा हा हा, वकील अपने को क्या करना है, हा हा हा, प्रत्यक्षा मेडम खतरनाक
कोतवाल है, उनको तो सब पता होगा ना! उन्मुक्त का पता क्या है? ईस्वामी का नाम क्या
है? अनूपजी फुरसतिया क्यों है? अफलातुनजी "अफलातुन" क्यों है? पुछो मेडम से, उनको
पता है क्या?
छोड ये सब, ये बोल, ईश्वर को हाज़िर नाज़िर जान कर बोलने का, टिप्पणी का
आपके जीवन में क्या और कितना महत्त्व है?
उतना ही जितना शरबत में चीनी का और खाने में नमक का!
और पीने में?
ये लालाजी से पुछो.
ह्म्म, अबी ये बोल, चिट्ठा लिखना सिर्फ छपास पीडा शांत करना है क्या ? आप अपने सुख के लिये लिखते हैं कि दूसरों के (दुख के लिये ;-)?
सिर्फ छ्पास पीडा शांत करने का ही, पर मेरा सुख अमुमन दुसरों के लिए हमेंशा
दुख बन जाता है, यह दुःखद है वकील.
ओके, अब वो एनकाउंटर स्पेश्यालिस्ट पुछ रेला है कि, कम्प्यूटर पर हिन्दी
टाइपिंग के बारे में सबसे पहले आपने कब सुना और कैसे, अपने कम्प्यूटर में हिन्दी में सबसे पहले किस सॉफ्टवेयर में/द्वारा टाइप किया और कब, आपको उसके बारे में पता कैसे चला ?
साल डेढ साल पहले सुना था, शुरू से माइक्रोसोफ्ट आई.एम.ई का प्रयोग करता रहा
हुँ, उसके बारे में शायद भैया से जाना था...... ए वकील, उनका नाम मत लिखना. अपने को
उनको नहीं फँसाना.
अबी ये सुन, आपका हिन्दी चिट्ठाजगत में आगमन कैसे हुआ, इसके बारे में कैसे पता लगा, पहला हिन्दी चिट्ठा/पोस्ट कौन सा पढ़ा/पढ़ी ? अपना चिट्ठा शुरु करने की कैसे सूझी ?
हिन्दी चिट्ठाजगत में आगमन भैया के कहने पर हुआ, पता भी उनसे चला, पहला चिट्ठा
जितुजी का पढा, पोस्ट तो याद नहीं.
ह्म्म, यदि भगवान आपको भारतवर्ष की एक बात बदल देने का वरदान दें, तो आप क्या बदलना चाहेंगे?
जातपात, ऊंचनीच और धार्मिक कट्टरता को बदलाना चाहुंगा.
बस्स, भीडु हो गया, हा हा हा... खल्लास.. अच्छा बोल, मई एकटिंग कैसा करता हुँ?
मतलब?
मतलब कि, वकील की आवाज़ वगेरा..
इस बार मैं चौंक जाता हुँ. "कौन, कौन हो तुम?"
मुझे रिसीवर से ठहाकों की आवाज सुनाई देती है. मैं इनकमिंग नम्बर याद करता हुँ, तभी फिर से आवाज आती है, अपने गुर्गों के नाम बोल फटाफट!
गुर्गे? कौन गुर्गे?
अबे हम उनसे भी सवाल पुछेंगे! जल्दी बोल.
कोई गुर्गा नहीं है मेरा, साथी हैं.
हाँ, तो उनके नाम बोल.
रितेश कुमार
प्रिय रंजन झा
मनिषा
रविश कुमार
मान्या
लेकिन आपलोग क्या पुछने वाले हो?
तेरे को क्या करना है? अच्छा चल बता देता हुँ, उनतक खबर पहुँचा देना हिम्मत है तो!1. हिन्दी चिट्ठाकारी ही क्यों?समझ गया? बोल देना इनको कि फटाफट जवाब मांगता है, नहीं तो.... अबी ये बोल ये सब पहले से वोंटेड तो नहीं है?
2. जीवन में कब सबसे अधिक खुश हुए?
3. अगला जन्म मिले तो क्या नहीं बनना चाहोगे?
4. कौन सा चिट्ठा सबसे अधिक पसन्द है, क्यों?
5. हिन्दी चिट्ठाजगत के प्रचार प्रसार में क्या योगदान दे सकते हैं?
हों तो भी फिर से पकड लो, मेरे बाकि के सारे साथी गिरफ्तार हो चुकें हैं, आप हो कौन, ये वकील का नम्बर आपके पास कैसे आया?
हा हा हा, अबे सिम निकालना बडी बात नहीं है, पर आवाज की नकल करना बडी बात है, मानता है ना?
मैं अपना पसीना पोंछता हुँ, और रिसीवर में से आ रही ठहाकों की आवाज़ सुनता हुँ. तभी एक महिला की धीमी आवाज सुनाई देती है, "श्रीश, बस हो गया टेप, फोन रख".
क्लीक...... और सब शांत.
मुझे यह शांति अच्छी नहीं लगती, जरूर कोई तुफान आने को है!!!

13 Comments:
"एनकाउंटर? सवाल..... सवाल... क्या है वकील, सवाल बोल', अब मुझे पसीना आने लगता है."
:)
"ईस्वामी का नाम क्या है ?"
इस सवाल ने तो मेरे को बी बोत परेशान किएला है यार।
मजा आ गया शांतिभाई। एकदम सई जवाब, जाओ आपकी जान बक्श दिया। :}
अंदाज़-ए-बयां पसंद आया भाई साहब
मज़ा आ गया आपका अंदाज़ देख्कर.. जवाब भी अच्छे लगे.. और आप डरे या नहीं पर मुझे जरूर डरा दिया.. आपको लेकर पूरे १५ सवाल हो गये.. लगता है जल्दी ही जवाब दे दूं नहीं तो कोई नहीं बचेगा फ़ंसाने को..
भाई बहुत मजा आया!
ऐ भाई क्या है मस्त जवाब है क्या
पंकज भाई , बहुत बढ़िया! भई मज़ा आ गया। मेरा तो मन करता था कि हर अनुच्छेद या संवाद के लिये अलन अलग टिप्पणी चस्पा कर दी जाय।
बहुत ही मज़ेदार और यह इसलिये भी कि जैसे अन्दाज़ के लिये कहा गया, ठीक वैसे ही लिखा!
जब से शांति भाई बने हो, तबसे गैंग गुर्गों में बहुत अटके हो. सही जा रहे हो, बहुत मजा आया बेखौफ बयानी पर. वाह!!
वाह भाई बहुत खूब..बधाई ..
और खूब फ़साया आपने ...धन्यवाद !!
:)), yaar aap log ye sab kya karte hon, great job,
Yaar main hans hans ke lot pot hue ja raha hoon, It's really amazing, तेरे नाम का वोरंट निकाल चुकी है,:)) अबे बावळा हो गया क्या, साले जानता नहीं वो क्या है. उठाकर ऐसा पटकेगी कि पानी नहीं मांगेगा तु. :))
Yaar hum to fida hon gaye aap logo ki shelly per.
Aap logo ne hindi language ko ek bahut ucha samman diya hain, baki esa lagta tha jaise internet per english ka hi samrajy hai.
Munsi premchand, Nirala Ji in sab ki stories primary schools mai pada karte the, phir maloom nahi careear ki bhag dod main kaha bhul aaye who sare pal, But jab se aap logo ke blogs pade hai (pratyakha, sanjay begani ji, pankaj ji, Kaviraj, rakesh khandelwal) esa lagne laga jaise main premchand ji ki kisi story ke villege wale scean main pauch gaya jaha sab upanyaskar and writer bhare pade hai.
Mujhe maloom nahi ki kaise maien apne vichar batau, abhi thode din pahle hi mujeh in blogs ke link mile, hamesha blogs padta hoon, but kabhi comment nahi kar pata, aaj to raha hi nahi gaya and keyboard per ape aap hi hath dodne lage. Naman aap sab logo ko,
maien hamesha try karta hoon ki mujhe kahi se premchand ji, nirala ji etc ne novals mil jaye, koi community mil jaye jaha main unhe pad saku, i think my search ends here.
Oops main apne bare maien batana hi bhul gaya,Myself vineet from rajasthan and working in delhi as Sr. Software engineer. Pranam sweekar kare aap sab log.
esa lagta hai jaise tanhai ka sathi mil gaya koi :)
Vineet
yaar aap logo ke pakda pakdi ke khel se mujhe ek fayda hon gaya, sari fishes ek sath mil gayi, :)warna dund dund kar pareshan hon gaya tha sabke links thanks for starting this game :)
Vineet
vineetji,
aapko sare hindi blogs ki links yanha mil jaegi..
http://narad.akshargram.com
डॉन अर्ररर छोटा वकील आखिर पकड में आ ही गया । पूरे नम्बर मिलते हैं या कहें उसके ऊपर भी कुछ और ।
मज़ा आ गया ।
पास हुये बबुआ! बधाई!
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