कुछ हल्का फुल्का
बहुत बार युंही बैठे बैठे कुछ टुचके बना लेता हुँ. कई बार भैया को सुनाता था, कई बार भूल जाता था. अब जबकी मेरा हिन्दी ब्लोग हो गया है तो सोचा क्यों ना आप सब के साथ ही हँस बोल लूं. पेश है कुछ टुचके:
(१) देव साहब ने अपनी नई फिल्म में बताया कि आदर्श प्रधानमंत्री कैसा होता है. ईसमें उन्होने यह भी दिखाया कि कैसे हमारे फिल्मी प्रधानमंत्री यानी कि देव साहब खुद एक विदेशी पत्रकारा को चुँबन करते है.
"धत तेरे की" - यही सोचा होगा ना अटलजी ने. यह फिल्म पहले क्यो नही बनाई. यह तो पता ही नही था.
(२) हमारे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कहते है " We should be Bold!!".
अरे गुरूजी, पहले खुद तो Bold हो जाओ. रोज सुबह १० जनपथ से तो आपकी Good Morning होती है. मेडम की इजाजत के बगैर फाईल नहीं हिलती, देश कैसे चलेगा?
(३) अटलजी ने लाल किले की प्राचीर से कहा था " २००७ तक भारत चाँद पर पहुँच जाएगा".
अब भारत का तो पता नहीं पर आजकल अटलजी खुद ईद का चाँद हो गये है, दिखते ही नहीं. NDA की हार के बाद राजनिति से सूर्यास्त हो ही गया था, अब Retirement की विधिवत घोषणा के बाद चंद्रास्त भी हो गया है.

1 Comments:
पंकज भाई, आपके 'टुचके' पढ़ कर मज़ा आ गया, खासकर पहला वाला। वैसे, मुझे लगता है कि आपने अपना ब्लॉग अभी तक हिन्दी एग्रीगेटर्स की ब्लॉग-सूची में नहीं डाला है। इस वजह से आपकी नयी प्रविष्टियों की जानकारी नहीं मिल पा रही है।
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