भारत की बिकाऊ गरीबी :: The Great Indian Slum Tourism
रोज सुबह आठ बजे अपने नहा धोकर, एकदम फ्रेश होकर ना डियो शियो लगाकर क्या करते हैं?
टाइम्स नॉउ (Times Now) चैनल चलाते हैं। काहे बोलो?
1. उनका सेट बडा धांसु है, स्टाइल बडी खाश है
2. फोगट की चिक पिक नहीं सुनने की मिलती
और नम्बर 3..... वो ही तो मेन है भाई। उपर के दो तो चलो अपनी इमेज बचाने के लिए लिख दी। मेन वजह है नुपुर!! वो एंकर। हाँ जी बडी सोणी कुडी है जी। अपने तो वही देखते हैं। वो बोलती है मैं देखता हुँ। अब दुनिया जले तो जले। मेरी बहना कहती है इसके दाँत खराब है, मै कहता हुँ तो?!? तेरा क्या जाता है भाई! बीवी बोले मोटी है!! मै कहता हुँ तो?!? तु राजदीप से काम चला। अपने को तो यही सुहाती है।
हो गया...... आ गया मजा? मन में रट लिया टाइम? पता है कल आपकी टीवी पर 8 बजे क्या चलेगा। चलो अब मटरगस्ती छोडके मुद्दे पे पल्टी मारते हैं -
आज नुपुर बोली बिक गई गरीबी!!
एल्लो पता ही नही था अतुल्य भारत में सब बिकता है। अब लोगों ने गरीबी भी बेच दी।
कुडी के खबरीयों को पता चला की कुछ टुर ओपरेटर हैं, जो अपने इंडिया के टुर पेकेज में स्लम टुर भी शामिल करते हैं। हाँ सच्ची! फोटु भी दिखाई अपने को। एक टुर गाइड कुछ गोरे चिट्टे लोगों को धारावी घुमा रहा था।
"सी सर.. हाउ पुअर। सी दिस.. ओल मेश.. डु यु लाइक इट? केन आइ शो यु मोर? कम हीयर... ओह नो नो सर.. सोरी। इन योर पेकेज यु आर नोट एलीजीबल टु सी दिस.. नो नो.. नो हाल्फ नेकेड चाइल्डस... प्लीज चुज अनादर पेकेज..."
किधर घुम रहे थे, बोलो? हाँ........ आमची मुम्बई में। अरे बॉस धारावी है ना! बस काम हो गया। विदेशों से बुलाओ गोरों को और दिखाओ धारावी.. और बेच दो गरीबी!!
इत्ता गुस्सा आया हुज़ुर कि पुछो मत। पर क्या करें, अपने लोग ही बेच रहे हैं गोरों को क्या दोष दें। और मुखमंतरी का कहते हैं ये भी सुनो। बोले हमें कुछ ना पता है।
ओये सच्ची हुजुर! कुछ ना पता?
मालिक ये पता है धारावी कहाँ है? कि वो भी भूल गए?
छोडो यार अपने तो धन्धा करते हैं? धारावी की गरीबी तो बिक गई। अब क्या बेचें?!?
हाँ गुड आइडिया.... चलो कोलकाता का सोनागाच्छी बेचते हैं। वंडरफुल आइडिया।

3 Comments:
टूर पैकेज वाले तो पैसे कमाने का धंधा करते हैं। वो तो वही बेचेंगे जो चीज़ गोरे देखना चाहते हैं। अब इसमें गड़बड़ की तो मीडिया वालों ने। मैं कुछ दिन पहले एक डॉक्यूमेंटरी देख रहा था, उसमें दिखायी गई भारत की गरीबी। तो अगर डॉक्यूमेंटरी में गरीबी थी पर छुट्टी मनाने वाले गोरे को मिली नहीं तो उसे लगेगा ढंग से नहीं देखा इंडिया। तो वो टूर पैकेज से उम्मीद करेगा कि उसे ढंग से इंडिया दिखाया जाए। हमसे कोई पूछता है तो हम उसको बताते हैं कि कैसे ये मीडिया सिर्फ एक पहलू दिखा कर हमदर्दी हांसिल करती है।
कुछ वर्ष पहले डिस्कवरी देख रहा था, एटलांटा में। हैरान रह गया देख कर कि वे लोग कुछ बैंककर्मियों द्वारा अँधविश्वास दूर करने के प्रयास दिखा रहे थे। रोचक था कार्यक्रम। कालसेंटरो और आऊटसोर्सिंग ने पश्चिमी मीडिया को साँपसपेरे से ऊपर उठकर देखने को मजबूर किया है। पर हमारा मीडिया अभी शेखचिल्ली ही रहेगा, जब तक कि सीएनएन और फाक्स का हमला नही होता।
क्षितिज और अतुल,
इस मामले में मिडिया को यानि की टाइम्स नॉउ चैनल को दोष नहीं दिया जा सकता, क्योंकि मुझे उनकी स्टोरी में कुछ भी ऐसा नहीं लगा कि वे जबरदस्ती गरीबी दिखा रहे हैं. दोष असल में टुर ओपरेटरों का है.
अतुलजी, सी.एन.एन. और फोक्स के आने से कोई असर भारतीय मिडिया पर पड सकता है, मुझे नही लगता. वैसे भी यहाँ सी.एन.एन और आइ.बी.एन का गठबन्धन है ही और चैनल चल रहा है. मुझे फोक्स और सी.एन.एन. से टाइम्स नॉउ और 24 7 जैसे भारतीय चैनल अधिक व्यवसायिक प्रोफेशनल और अच्छे लगे.
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