21.12.06

चुनाव प्रचार >> हमको जीताय दो ठाकुर!!



चुनाव आ गये हैं। और हम भी उम्मिदवार हुए हैं। तो कृपया अन्यथा ना लेते हुए मेरा नाम देख लेवें।

नाम है: पंकज बेंगाणी
परचा करमांक: 12

देखिए जी जीताने लायक एकमात्र उम्मिदवार हम ही हैं और कोई नहीं। तो आप अपना किमंती मत हमको ही दिजीएगा। जजों की चिंता ना करें.... हम इतने तो लायक हैं कि उ लोग हमरा परचा खारीज नहीं ना करेंगे।

उ ससुरा गिरीराज का चीज है? (ईस्माइली) खडा हुआ हमरे खिलाफ! का किए रहे हैं सिवा कविता ठोकने के? (ईस्माइली) और उ सागरवा!! (ईस्माइली)हमरे भाइसा है तो का हुआ... कभी आए रहे नयी नयी पोस्ट लेकर..? (ईस्माइली)

एक समीरलालजी हैं! ससुरे खुब ही बाहबाही लुटते हैं (ईस्माइली) पर भाइ अब नौजवान का जमाना है! हम जवान हैं, लंगोट तान के हनुमानजी की तरह कुदें तो एक चिट्ठे से दुसरे चिट्ठे पर युँ ही पहुँच जाते हैं।

शिलपी महोदय का पढे रहे का? (ईस्माइली) खोपडीया में घुसता है कुछ? (ईस्माइली) (ईस्माइली) (ईस्माइली) स्साली... ओह छम्मा करना भाई... (ईस्माइली) गाली नहीं दिए रहे.. अन्यथा ना लें... हमरी खोपडिया में तो नहीं जाता। लिखो तो देसी लिखो। समझ आए। हमरी तरह।


तो भाई कोई माई का लाल ऑलराउन्डर बलोगरवा है तो हम ही हैं हम ही हैं हम ही हैं.... तो भूलना नहीं

नाम : पंकज बेंगाणी
परचा करमांक: 12


(हम फिर आएंगे आपके दवार। ई तो शुरूआत है।)

अब नारे नोट करिएगा:

भांग और देसी पिलाना है
पंकजबाबु को जीताना है

एक दो तीन चार
पंकजबाबु बारम्बार

दारू पीके लोट लो
पंकज भैया को वोट दो




10 Comments:

Anonymous Anonymous said...

हा हा हा मजा आ गया पढ़ कर
ई का पंकज बाबू
ई तो आचार संहिता का सरासर उल्लंघन का मामला बन रहा है :)
हम तो रेस में थे नहीं पर लगता है अब हमें भी अपनी कैनवासिंग चालू करनी पडेगी।

7:50 PM, December 21, 2006  
Anonymous Anonymous said...

जानकर बड़ा दुख हुआ कि आजकल तुम्हारा मन पढ़ाई में ठीक से नहीं लग रहा है. जो आज पढ़ते हो, कल तक भूल जाते हो. अब देखो, कल ही कबीर दास जी को पढ़वाये थे न!! कि जवानी पोस्ट में झलकना चाहिये न कि उम्र में. फिर हमारी ख्वाबों की रानी तो जवानों की जवानी की मिसाल पोस्ट है. :) :)

यह आचार संहिता के उलंघ्न का मामला आपके नारों पर तो बनता है, मगर मैं दिल से यही चाहता हूँ कि आपका नामांकन खारिज न किया जाये और आप ही जीतें, हालांकि उलंघ्न तो खुले आम हुआ है. :) :)

वैसे मैं तुम्हें ढ़ेरों शुभकामनायें देता हूँ कि तुम ही सर्वश्रेष्ट चिट्ठाकार चुने जाओ. यही मेरे दिल की पुकार है.


अपने निकटतम प्रतिद्वन्दी से मिली तहे दिली शुभकामनाओं को पाकर अगर आपका दिल भर आया हो, आँखें नम सी लगें या गला रुँध जाये, तो चुनाव से नाम वापस ले लेना. मन हल्का लगेगा.

:)

8:38 PM, December 21, 2006  
Anonymous Anonymous said...

मैं जो तुमको बतलाता हूँ, वह कोई कथा या गल्प नहीं
इनके पीछे हैम बरस लगे, अनुभव का कोई विकल्प नहीं
तुम घूम रहे दारू लेकर, शिवबूटी बांधे गमछे में
पर उड़नतश्तरी के भी तो हथकंडे कोई अल्प नहीं

11:34 PM, December 21, 2006  
Blogger Pratyaksha said...

:-)))

9:42 AM, December 22, 2006  
Anonymous Anonymous said...

क्‍या आप मूझसे कह रहे है? क्‍योकि मुझे आप सब के बीच मात्र मै एक ही ठाकुर(सिंह) हूँ। अरे कहे भूलते है कि मै भी तो उम्‍मीदवार हूँ भले ही नामांकन पत्र अभी दाखिल नही किया है। कोई पंडि़त जी हो तो बताये कि नामाकंन पत्र कब दाखिल जाये? बिना स्‍माईली के ही कृपया अन्‍यथा न लिजिऐगा।

9:58 AM, December 22, 2006  
Anonymous Anonymous said...

चुनाव प्रचार को आचार संहिता की सीमा मे रखकर करें, नही तो आपका पर्चा रद्द कर दिया जाएगा। इसलिए, स्माइली का सहारा छोडिए और अच्छे अच्छे लेख लिखिए, काउन्टर अटैक करने से आपके प्वाइंट ही कम होते है।

वैसे भी ये प्रतियोगिता, आपस मे प्यार बढाने का जरिया है, घटाने का नही।

-चुनाव आयोग आयुक्त (प्रथम,द्वितीय,तृतीय)

11:44 AM, December 22, 2006  
Blogger पंकज बेंगाणी said...

चुनाव आयुक्त साहब मुझ अनाडी को क्षमा करे‍।

अब नही करेन्गे बत्तमिजी... सुधर गये है‍ भाई।

अगली पोस्ट का इन्तजार करिएगा... शालिनता से लिखेन्गे। और अछे अछे नारे देन्गे। जय हिन्द

2:07 PM, December 22, 2006  
Anonymous Anonymous said...

:)

8:20 PM, December 22, 2006  
Anonymous Anonymous said...

वाह जी कार्टून देख कर मजा आ गया। दारु तो हम पीते नहीं जी, लेकिन नोट भेज देना।

चुनाव आयुक्त जी जिसमें पंकज जी खुलेआम जनता को दारु और नोट बाँट रहे हैं इस बारे में कार्यवाही की जाए। पिला तो हम भी रहे हैं लेकिन कोई साबित नहीं कर सकता कि वह दारु है - http://epandit.wordpress.com/2006/12/21/epandit-ka-manifesto/

8:14 AM, December 23, 2006  
Anonymous Anonymous said...

पंकज भाई,
एक खम्बा चेन्नई भी भीजवा देना !

3:24 PM, December 29, 2006  

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