जब चाहा, जो लिखा
Labels: ahmedabad railway station development
posted by पंकज बेंगाणी at 10:14 AM
सफर की " सफ़रिंग " से राहत मिलेगी !!
बहुत अच्छा ! सकारत्मक परिवर्तन देखकर खुश होना और उसमें हाथ बटाना सबका कर्तव्य है।नकारत्मक चीजों की उपेक्षा होनी चाहिये या अंधेरे में एक छोटा सा दिया जलाना चाहिये।
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छवि मीडिया एंड कम्यूनिकेशन कम्पनी तथा तरकश नेटवर्क का सी.इ.ओ हुँ. सामान्य ब्लॉग लेखक भी हुँ. बस, काफी है.
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2 Comments:
सफर की " सफ़रिंग " से राहत मिलेगी !!
बहुत अच्छा ! सकारत्मक परिवर्तन देखकर खुश होना और उसमें हाथ बटाना सबका कर्तव्य है।
नकारत्मक चीजों की उपेक्षा होनी चाहिये या अंधेरे में एक छोटा सा दिया जलाना चाहिये।
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