28.1.06

कुछ हल्का फुल्का - 3

१. धरमसिंह को बडी मजबुरी के साथ ही सही आखिरकार इस्तिफा देना ही पडा.
क्या करें साहब, अपने धरम पाजी शरिर से कुछ ज्यादा ही ठीक है ना. एक बार कुरशी पर धँस गये तो उठना तो भारी पडता ही है ना.

२. आमिर खान की "रंग दे बसंति" हिट हो रही है.
बढिया है, "मंगल पांडे" फ्लोप होने के बाद आमिर की भी एक "सिमा" आ गयी थी, पर यह फिल्म चल रही है तो एक आशा कि "किरण" दिखाई दी है.

३. उमा भारती ने कहा,"BJP चालीस चोरों की पार्टी है. मेरी पार्टी एक पारदर्शी पार्टी होगी.
सहि है, सो चुहे खाकर बिल्ली हज को चली.

. मैने नारद में पाँच बार एन्ट्रि मार दी, तो जितुजी की वोर्निंग आ गयी. हम क्षमाप्रार्थी हुए पर अमित भाई को कुछ ज्यादा ही तकलीफ हो गयी.
भाईसाहब आप तो नारद से संभंधित ही नही है. तो इसे क्या कहें, "बेगानी शादि में अब्दुला दिवाना"

1 Comments:

Blogger RC Mishra said...

बिल्कुल!
अमित भाई, Oversensitive है‍!

5:46 PM, February 05, 2006  

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