8.2.06

मै पद्मश्री होना चाहता हुँ

आज युँही बैठे - बैठे ख्याल आया कि क्यो ना पद्मश्री हुआ जाए. सोचा ख्याल तो अच्छा है. समाज मे रूतबा भी बढेगा और फ्री मे राष्ट्रपति भवन देखने का मौका भी मिलेगा. तो भई मुझे अब पद्मश्री होना है. कैसे हुआ जाए. सोचा, बहुत सोचा. फिर इस नतिजे पर पहुँचा कि यह इतना आसान नहि. खाशकर मेरे जैसे आम इन्सान के तो बस कि बात ही नही है. ना ना आप समझे नही शायद. आम इन्सान इसलिए नही कि मैने कोई तीर मारा ही नही आज तक. कभी सुर्खियो मे भी नही आया. तो सरकार पहचानेगी कैसे मेरी प्रतिभा को? ना जी बात इतनी सरल कँहा है. पद्म का दम भरने के लिए दो-चार चीजें अति आवश्यक है. इस पर गौर फरमाया जाये:

१. पहले तो सुनिश्चित करें कि आप कही सुपर फेमिली यानी कि गांधी-नेहरू परिवार से सम्बन्धित तो नही है? घभराईए मत. हैं तो अच्छा ही है भाई. फिर कोई टेंशन नही. प्रतिभा नही, चलेगा. उम्र कम है, चलेगा. भारतीय है भी-नही भी, चलेगा. अरे कोई तीर भी नही मारा, तो भी चलेगा. गांधी-नेहरू परिवार का थप्पा है ना. बस बहुत हो गया. भईये पद्मश्री का सपना देखना छोड दो अब. उदास क्यो हो गए. अरे मै आपको भारत रत्न दुंगा. सच्ची. तुम मुझे गांधी-नेहरू परिवार सर्टिफेकट दो - मै तुमको भारत रत्न दुंगा. खुश. हाँ, सही में यह इतना आसान है. गांधी-नेहरू सर्टिफाइड होते ही भारत रत्न पक्का. देखो ना सब के सब तो रत्न भरे पडे है. नेहरू ले लो, इंदिरा ले लो, अरे राजीवजी भी हो गए थे. और यकिन करोगे, सरदार पटेल से पहले ही हो गए थे. वाह, परिवार हो तो ऐसा. सब के सब रत्न. जो नही है वो भी हो जाएंगे. सोनियाजी तो सारे देश की माँ है ही. यही तो कहा था एक मख्खनबाज कोंग्रेसी ने. अब माँ को रत्न कौन नही देना चाहेगा? मँ सबको प्यारी होती है. दे देंगे वो भी. अभी तो वैसे भी सारा देश उन्ही का तो है. एक दो श्री या भूषण वगैरह राहुल भैया और प्रियंका दीदी को भी मिल जाना चाहिए अब. ट्रेलर तो दिखा दो उनको. पूरी पिक्चर थोडे बडे होने पर दिखा ही देनी है. अरे sorry sorry, एक बिल्ला हमारे प्यारे जीजु रोबर्ट को भी दे दो भाई. नही तो बुरा मान जाएंगे. देखो थोडे दिन पहले बिगड गये थे कि एयरपोर्ट पर checking नहि करवायेंगे. देखो छुट देनी ही पडी. देश के कुँवरसाहब है ना. तो भई बात इतनी सी है कि गांधी-नेहरू परिवार से सम्बन्धित है तो समझिए हो गये वारे न्यारे. मिल जाएगा रत्न. सरकार के घर देर हो सकती है पर अंधेर नही. मिलेगा ही मिलेगा.

२. पर होते है कुछ बदनसीब. मेरे जैसे. कँहा पैदा हो गया मै. गांधी-नेहरू परिवार से दूर दूर तक कोई नाता नही. क्या यार अब कुछ तो करना ही पडेगा. सबसे पहले तो थोडा बहुत तीर जैसा कुछ मार लो.कुछ भी चलेगा. वैसे भी मै ब्लोगदुनिया का बादशाह तो नही पर प्यादा तो हो ही गया हुँ. वाह बहुत है बहुत है. चलो दुसरा चरण अब - सरकार मे सेटिंग करो. अरे भाई सेटिंग के बीना तो नही चलेगा. देखो कि कैसे भी करके नोमिनेशन मिल जाए. समझो एक बाधा पार. कैसे भी करो. रोओ धोओ. गिडगिडाओ. घूस वूस दो. नोमिनेशन भेज दो बस. फिर तीसरा चरण - सेलेक्शन कमेटी को फोडो. ये तो बडी बाधा है साहब. आपको अमर सिंह जैसा खोपडी बाज होना पडेगा. उतना नही तो उनका 25 percent भी हो गये तो हो गया काम. उछलो नाचो गाओ. अब अगली मुलाकात तो राष्ट्रपति भवन मे ही होगी. फिर मिलेंगे.

३. और कहीं आप मेरे जैसे तो नही है. कोई सेटिंग भी नही है. गांधी-नेहरू परिवार से नाता भी नही है. फिर तो बस ख्वाब ही देखो. मिलने से रहा तमगा तुमको. क्योकि हम सो जनम मे भी लता मंगेशकर, बिसमिल्ला खान या सरदार पटेल तो होने से रहे कि प्रतिभा कि देर सवेर याद आ ही जाए. तो बस ख्वाब देखो कि अगला जन्म गांधी-नेहरू परिवार मे ही हो. हे भगवान सुन रहे हो ना?

1 Comments:

Anonymous Anonymous said...

पंकज भाई
संघंर्ष करो हम तुम्हारे साथ है.

आशीष

9:14 AM, February 09, 2006  

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