कानपुर की काली सेना
आज सुबह मैने सबसे तेज़ चैनल के छोटे चेतक "तेज़" में एक खबर देखी, कानपुर में युवतीयों ने मनचलों से अपनी रक्षा हेतु एक काली सेना बना रखी है जो इनसे लोहा ले रही है।
और कुछ शरीफ किस्म के युवकों ने अपनी बेवजह धुलाई से बचने और काली सेना पर "काउंटर अटेक" करने के लिए लाल सेना गठित की है।
कमाल है भई, समाजवादी पार्टी शासित उ.प्र. में भी ऐसा होता है?
शायद महापुरूष - जिन्होने बजरंगी, दुर्गा वाहिनी और मोदी की पुलिस जैसे जुमलों का बखुबी प्रयोग किया था - मेरी उत्कंठा का यथोचित निदान कर पाएंगे कि इस मामले में मुलायम सिंह की पुलिस क्या कर रही है?
कृष्ण राधा संगम पर पैनी निगाह के साथ अफलातुन पृविष्टी लिखने वाले सजन्न इस लाल-काली सेना की भी भ्रत्सना करते ही होंगे ऐसा मेरा विश्वास है!
क्योंकि सार्वजनिक रूप से हम मुद्दों को उठायें या नहीं, हमें पता होता है कि क्या सही है क्या गलत!
सवाल तो यह भी हो सकता है कि समाजवादी मुलायम सिंह की पुलिस निठारी कांड जैसे जघन्य अपराध को क्यों नहीं रोक पाई? पर हर सवाल पुछे नहीं जाते और ना ही हर घटना का मजाक बनाया जा सकता है। ऐसे सवालों के जवाब तो हमें ही ढुंढने होंगे, हर किसी को ढुंढने होंगे।

7 Comments:
सवाल तो यह भी हो सकता है कि समाजवादी मुलायम सिंह की पुलिस निठारी कांड जैसे जघन्य अपराध को क्यों नहीं रोक पाई?
अरे भई उनको कोई सपना थोड़े ही आएगा, अब उस बंदे ने कठोर सिंह से सलाह मश्वरा करके यह काम नहीं किया, बेचारा कठोरवा क्या करे?? ;)
वैसे भी, डूब मरन की बात तो ई है कि उ ससुरा दिल्ली आई गवा लेकिन सूपरस्टिशस फूल निठारी ना गया, चुनाव सिर पर हैं ना, कहीं उ का हराय के बहनजी आई गई तो उ कहाँ जाएगा!! अब बनवास बहुतेरा भारी पड़त है ना, इसलिए ई सब जुगत तो करी ही पड़ै है!! ;)
मैं वही कहना चाहता हुँ अमित कि अगर कठोर सिंह को सपना नहीं आ सकता तो मोदी को कैसे आता होगा?
लेकिन यह भी सोचो कि, लोग बच्चों के गुम होने की फरियाद लेकर पुलिस के पास जाते थे, तो भी पुलिस ने कुछ नहीं किया... शायद इसलिए कि बच्चे एडोब के सी.इ.ओ. के नहीं वरन गरीब तबक्के के थे।
बहुत शानदार टिप्पणी और प्रति टिप्पणी
अच्छा विश्लेषण किया है, अभी हाल मे ही इलाहाबाद मे एक इमारत गिरि है जिसको बनाने वाला समाजवादी पार्टी का कार्यकर्ता है और कुछ समय पूर्व वह जिले स्तर का कोषाध्यक्ष रह चुका है। मोदी इस लिये चुभते है कि वह भाजपा के है उनकी पार्टी के नही, यही दल बदल के मोदी सपा मे आप जाये तो वे बहुत अच्छे नेता हो जायेगे। नेताओं मे कुछ नस्ल गिरगिटो की है तो रंग बदलते रहेते है। मैने इलाहाबाद की घटना पर लेख अपने ब्लाग पर लिखा है।
मै भी जा रहा हूँ टूर पर, तीर्थ यात्रा करने, आईये आप भी प्रयाग के कुम्भ पर्व का लाभ ले ले। अच्छा लिख है
गलती हो गई हो सुख सागर से तीरथ करते हुऐ दूसरी वाली टिप्पणी तरकश तीर्थ पर आ गई है। :)
अच्छा लिखा गया और जवाब तलब की ज्यादा उम्मीद के विपरीत स्थितियां देखकर अच्छा भी लग रहा है. :)
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