देखना चाह्ता हुँ कि यह पोस्ट नारद पर कब आता है. आज नारद पर कुछ गडबड लगती है. मेरी पाठशाला की पोस्ट आई ही नही... और फिर आई भी तो एकदम पीछे... पुरानी पोस्टो के भी पीछे. वहाँ भी नारद का पन्ना कुछ गडबड है.
ये सब नारद मुनी का श्राप है. अब आप जब देखो तब नारद के पिछे पडे रहते हो. पहले शिकायत कर दी कि नारद मूनी को अंग्रेजी से प्रेम हो गया है ! भैये ऐसे पंगे लोगे तो आपकी प्रविष्टी समय पर कैसे आयेगी ?
खैर कोइ बात नही, आप नारद मूनी के अनुष्ठान का प्रबंध करे. अनुष्ठान सामग्री की सुची और विधी शुकुल देव से प्राप्त करे.
केसी बात कर रहे हो भईः ये आप के लेख का लिंक नारद से ही लेकर आया हूं, और भाई मेरे ब्लॉग की टम्पलीट में कुछ गडबड है, कल फुरसत मेले तो ज़रूर कुछ सुधारूंगा।
नही आशीषजी नही. मै तो नारद मुनी का अनन्य भक्त हुँ. पर क्या है कि आजकल 150 से ज्यादा तो नारदजी के भक्त हो गए है तो थोडा बहुत भटकाव हो ही जाता है. और मै ठहरा नटखट अधीर बालक. क्या करू. वैसे मै हुँ बडा आज्ञाकारी. क्यो जितुजी सुन रहे हैं ना??
वत्स पंकज, बड़े अधीर हो रहे हो क्या बात है? नारद के लिये सारे भक्त एक बराबर हैं।कोई छोटा बड़ा नही।रही बात तुम्हारी पोस्ट की,अब तुम ३० मार्च को पोस्ट लिखोगे और वो तीस मार्च वाली पोस्ट के साथ ही तो दिखेगी।
बंधु, उसका तो एक ही उपाय है, जैसे मथुरा त्याग गोविन्द ने अपनाई थी द्वारिका, उसी तरह आप भी ब्लॉगर त्याग अपनाओ वर्डप्रैस को। वर्डप्रैस में आप अपना timezone सैट कर सकते हो, जिसके कारण जब आप पोस्ट लिखोगे और छापोगे तो वह भारतीय समय दिखाएगा, जैसा कि मेरे ब्लॉगों पर होता है। :)
7 Comments:
ये सब नारद मुनी का श्राप है. अब आप जब देखो तब नारद के पिछे पडे रहते हो. पहले शिकायत कर दी कि नारद मूनी को अंग्रेजी से प्रेम हो गया है !
भैये ऐसे पंगे लोगे तो आपकी प्रविष्टी समय पर कैसे आयेगी ?
खैर कोइ बात नही, आप नारद मूनी के अनुष्ठान का प्रबंध करे. अनुष्ठान सामग्री की सुची और विधी शुकुल देव से प्राप्त करे.
केसी बात कर रहे हो भईः
ये आप के लेख का लिंक नारद से ही लेकर आया हूं, और भाई मेरे ब्लॉग की टम्पलीट में कुछ गडबड है, कल फुरसत मेले तो ज़रूर कुछ सुधारूंगा।
नही आशीषजी नही. मै तो नारद मुनी का अनन्य भक्त हुँ. पर क्या है कि आजकल 150 से ज्यादा तो नारदजी के भक्त हो गए है तो थोडा बहुत भटकाव हो ही जाता है. और मै ठहरा नटखट अधीर बालक. क्या करू. वैसे मै हुँ बडा आज्ञाकारी. क्यो जितुजी सुन रहे हैं ना??
वत्स पंकज,
बड़े अधीर हो रहे हो क्या बात है?
नारद के लिये सारे भक्त एक बराबर हैं।कोई छोटा बड़ा नही।रही बात तुम्हारी पोस्ट की,अब तुम ३० मार्च को पोस्ट लिखोगे और वो तीस मार्च वाली पोस्ट के साथ ही तो दिखेगी।
अपनी पोस्ट की तारीख को सुधारो, सब ठीक हो जाएगा।
हाँ, मुनिवर सही है. सारे भक्त एक जैसे है. और हमे तो ब्लोगर पर तारिख का फोरमेट अमरीकी रखना पडता है, उससे गडबड होती है. उसका क्या करे?
बंधु, उसका तो एक ही उपाय है, जैसे मथुरा त्याग गोविन्द ने अपनाई थी द्वारिका, उसी तरह आप भी ब्लॉगर त्याग अपनाओ वर्डप्रैस को। वर्डप्रैस में आप अपना timezone सैट कर सकते हो, जिसके कारण जब आप पोस्ट लिखोगे और छापोगे तो वह भारतीय समय दिखाएगा, जैसा कि मेरे ब्लॉगों पर होता है। :)
दिक्कत यह है अमित कि हमारे दस से अधिक ब्लोग है और द्वारकाधीश वर्डप्रेस मल्टीयुजर भी नही है. अब किसे किसे सेट करे.
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