अहमदाबाद में CNG क्रांति
आज से दो साल पहले: सन 2004
अहमदाबाद भारत का सबसे प्रदुषित शहर माना जाता था. और सही भी था. यहाँ की सडको पर इतना धुँआ था कि कोई सांस ही क्यों ना ले ले. एक साल पहले भारत सरकार ने जो सबसे प्रदुषित शहरो की सुची जारी की थी उसमे भी अहमदाबाद अव्वल था. फिर कानपुर, दिल्ली, चैनई का नम्बर आता था. केन्द्र सरकार द्वारा गठीत भुरेलाल समिति ने इन प्रदुषित शहरो मे वाहनो के CNGकरण पर जोर देने की सिफारीश की थी.
अहमदाबाद मे खस्ताहाल ऑटो-रिक्शा चलते थे, वो भी अवैध रूप से केरोसीन डालकर. उनसे निकलने वाला धुँआ इतना भयानक होता था कि, आदमी को बिना पीए ही दिन की 100 - 200 सिगरेट पीनी पड जाती थी. महानगरपालीका की बसें भी चलती फिरती प्रेत ही नजर आती थी. कब बन्द पड जाए या कब चपेट मे ले ले भगवान ही मालिक था. सडको के दोनो किनारो पर धुल पडी रहती थी जो हवा मे घुलकर प्रदुषण को बढाने मे अपना अमूल्य योगदान देती थी.
आज सन 2006:
अब बदलाव की बयार बहने लगी है. अहमदाबाद मे CNG क्रांति आई. केरोसीन से चलने वाले ऑटो CNG मे बदल गए. काले खटारा ऑटो की जगह पीले और हरे खुबसुरत ऑटो ने ले ली. वो भी बिना किसी धरना प्रदर्शन के. जैसा की दिल्ली मे हुआ था. दिल्ली के CNGकरण पर जो दिक्कते आई थी, वैसी दिक्कते यहाँ नहीं आई. सबकुछ शांति से और चुपचाप कब हो गया पता ही नही चला. आज अहमदाबाद के 99% ऑटो CNG मे बदल गए है. कुछ दिन पहले भुरेलाल समिति ने भी उच्चतम न्यायालय मे कहा कि अहमदाबाद मे प्रदुषण पर लगाम लगी है.

रोज की हजारो कारे CNG - LPG मे बदल रही है. मेरी कार भी LPG पर चलती है. महानगरपालीका ने सैंकडो नई CNG बसे खरीदी है और हजारो खरीदी जानी है. अहमदाबाद मे यह सब सुनियोजीत तरीके से हुआ था. पहले CNG पम्प खोले गए और CNG की किल्ल्त नही रही. फीर ऑटो वालो को भी लगने लगा कि CNGकरण के काफी लाभ है. आज उनको प्रति किलोमिटर 50 पैसे का ही खर्च आता है, ऐसा मुझे एक ऑटो वाले ने कहा. अहमदाबाद मे धुल और गर्द को हटाया जा रहा है, तथा नई आधुनिक सडके बन रही है.


और फिर देश की पहली BRTS यानि बस रेपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर भी अगले महिने से काम शुरू होने वाला है, जिसमे बसे सडक के मध्य मे बनाई गई स्पेश्यल लेन मे चलेगी. और यदि केन्द्र सरकार मेहरबान हो ही जाए तो शायद लम्बित पडे अहमदाबाद मेट्रो परियोजना पर भी काम शुरू हो जाए. इसके अलावा साबरमती रीवरफ्रंट के पुरा होने का भी बेसब्री से इंतजार है.
खैर अब चौराहों पर पहले जैसा दम नही घुटता.
(रवि कामदार शायद पुरा सहमत ना हो मुझसे :-) , पर काफी हद तक तो होगा)
(रवि कामदार शायद पुरा सहमत ना हो मुझसे :-) , पर काफी हद तक तो होगा)

3 Comments:
kya baat hai pehle us bhai ne ab is bhai ne lekh daala hai अहमदाबाद par.
Lekin ek baat ki daad doonga ki "अहमदाबाद men sara kaam shanti se ho reha hai, aise hi unnaati karta rahe to bahut achha hai.
You've got some great long time exposure shots of the city. love it!
This is very good news. As an ahmedabadi now living in California, I now have a very good incentive to plan a trip home!
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