भ्रमण :: अहमदाबाद [2]
कांकरीया झील:
अहमदाबाद आकर कांकरीया झील ना जाएँ ये कैसे हो सकता है. कांकरीया झील पुराने अहमदाबाद की पहचान है. इसके विशिष्ट आकार तथा कद के कारण यह हमेंशा से भ्रमण के लिए बेहतरीन जगह रही है. सबसे पहले गुगल अर्थ के द्वारा लिया गया यह सेटेलाईट चित्र देखें:
दूर से पुरी तरह गोल नज़र आती यह विशाल झील वास्तव में गोल नही है. यह कुल मिला कर 32 बाजुओं (साइड) से बनी है, प्रत्येक बाजु करीब 60 मीटर बडी है. पुरी झील करीब दो किलोमिटर की परिधी में फैली है.
इस झील को सुल्तान कुत्तुबुद्दीन ने सन 1451 में बनाया था. ईस झील के बीचोबीच एक उद्यान तथा सैरगाह है जिसे नगीनावाडी कहा जाता है.
यह जगह मुगल राजा जहाँगीर तथा नूरजहाँ की पसन्दीदा जगह थी. तथा वो गर्मी के प्रकोप से बचने के लिए इस जगह आया करते थे.
कांकरीया झील के चारों तरफ बच्चों के घुमने के लिए कई सारी जगह है. बालवाटीका में वो तरह तरह के झुले झुल सकते हैं, चिडीयाघर में विभीन्न प्राणी देख सकते हैं, एक मत्स्यालय तथा वोटरपार्क भी है.
कांकरीया झील के चारों तरफ बच्चों के घुमने के लिए कई सारी जगह है. बालवाटीका में वो तरह तरह के झुले झुल सकते हैं, चिडीयाघर में विभीन्न प्राणी देख सकते हैं, एक मत्स्यालय तथा वोटरपार्क भी है.
यहाँ घुमने का सही समय वैसे तो शाम का ही है पर अगर उपरोक्त बताए जगहों पर भी जाना चाहें तो दोपहर तक आना उत्तम रहता है. रात ढलने पर आप म्युजीकल फाउंटेन का मज़ा भी ले सकते हैं.
कांकरीया झील वैसे तो पुराने शहर में स्थित है, पर आधुनिकता का असर वहाँ पर भी दिखने लगा है. कांकरीया के पास ही स्थित है गुजरात का सबसे बडा शोपिंग मॉल 10 एकर्स (अभी तक). तो रात में शोपिंग भी कर सकते हैं. तो हो आइए.
अगली बार: साइंस सीटी

5 Comments:
Pankaj Bhai, अहमदाबाद घुमाने के लिए आपका शुक्रिया और उम्मीद है आगे भी ये सिलसिला जारी रहेगा।
पुराने दिन याद दिला दिये आपने, १९९९ से २००२ तक अमदावाद में रहा..
और कांकरिया में कई शामें काटी..
पंकज भाई
गूगल अर्थ वाला चित्र बहुत सुन्दर है
नितिनभाई, अमदावाद आवो तो अमारा घरे आवजो.
हाँ, सुहैब जारी रहेगा. बीच बीच में कुछ और भी लिखुंगा पर भ्रमण जारी रहेगा.
अच्छा है।
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