5.4.06

भ्रमण: फोटोग्राफरों का स्वर्ग अहमदाबाद का सरखेज रोज़ा

अहमदाबाद आएँ और कहीं घुमने फिरने ना जाएँ ये हो नही सकता, और घुमने निकले और सरखेज रोज़ा ना जाएँ वो भी हो नही सकता.

अहमदाबाद वास्तुकला की दृष्टि से काफि ख्यातिप्राप्त शहर है. पौराणिक, परम्परागत और आधुनिक सभी तरह की वास्तुकला अहमदाबाद मे देखने को मिलती है. तभी तो मशहुर वास्तुशिल्पी ला कार्बुज़ीय ने अहमदाबाद को वास्तुकला का स्वर्ग कहा था. पुराने तथा परम्परागत वास्तुकला के दर्शन करने हो तो पुराने शहर मे निकल पडिए. यहाँ इस्लामिक और हिन्दु वास्तुकला का अद्भूत संगम देखने को मिलता है. ऐसी ही एक जगह है सरखेज रोज़ा.


सरखेज रोज़ा पर छायांकन में व्यस्त मैं यानि मास्साब यानि पंकज बेंगाणी. तस्वीर खींची अभिजीत ने.
सरखेज रोज़ा की खिंची हुई तस्वीरों के लिए देखते रहिए मेरा फोटोब्लोग.



संक्षिप्त इतिहास:
सरखेज रोज़ा अहमदाबाद के उपनगरीय विस्तार सरखेज में स्थित है. यहाँ संत अहमद खंटु गंजबक्ष की दरगाह है. यहाँ पर राजा शाह आलम बेगडा तथा उसकी बेगम की कब्र भी है. साथ ही राजा का ग्रीष्मकालीन महल भी स्थित है. यह महल सन 1400 इसवी मे बनाया गया था. संत गंजबक्ष महमुद बेगडा के आध्यात्मिक गुरू थे.

संक्षिप्त विवरण:
सरखेज रोज़ा में बीचो बीच एक मानवनिर्मित झील है, तथा बाकी के वास्तुशिल्प इस झील के चारों ओर बने हुए है. एक तरफ संत गंजबक्ष की दरगाह तथा मस्जीद है दुसरी तरह महमुद बेगडा का महल है. यहाँ हिन्दु स्थापत्य का बेमिसाल नज़ारा देखने को मिलता है. आज महल के तो कुछेक अवशेष ही साबुत बचे है.
अधिक जानकारी के लिए यहाँ देखें.

भ्रमण का समय:
सरखेज रोज़ा जाने का सर्वोत्तम समय प्रभात का है. सुबह सुबह 6 से 7 बजे तक जाना उपयुक्त है. हाँ साथ मे केमेरा जरूर लेकर जाएँ, नही तो पछताएंगे.

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