कुछ पता भी है क्या हो रहा है?
बस यही तकलीफ है ना आप लोगों के साथ. ब्लोग लिखते रहते हो. दीन-दुनिया की कुछ ख़बर भी है आपको. देखिए क्या से क्या हो गया है एक रात में:
- नारद मुनि हडताल पर जा रहे है. जीँहा, क्या करे वो भी. 160 हिन्दी ब्लोगर बस दिन रात जुटे रहते है, कुछ भी अगडम बगडम छापते रहते है. अब नारदमुनि किस किस की ख़बर रखेंगे. बस जा रहे हैं हडताल पर. अब बैठे रहो. मिलने से रही नई खबर. लोग लिखते रहेंगे, और आप बस ढुंढते रह जाओगे.
- अमित गुप्ता का ब्लोग भी बन्द हो रहा है. मेजिक आई-वेजिक आई सब भुल जाओ. कल रात उन्होने फोन पर बताया, वे विश्व हिन्दु परिषद के कार्यकारी सचिव बनने जा रहे है.
- और अपने राष्ट्रवादी संजयभाई जोगलिखी वाले राष्ट्रद्रोही हो गए है. परमानेंटली अमरीका में सेटल होने जा रहे है. अब सिर्फ अंग्रेजी मे लिखेंगे.
- रवि कामदार को वैराग्य हो गया है. आदरणीय शंकराचार्य की परम कृपा से दिक्षीत होकर अब हिमालय जा रहे है, तपस्या करने.
- ई-स्वामी ने अपने हिन्दीनी टुल को कुछ जंतर - मंतर कर दिया है. अब अगर उस टुल मे हिन्दी मे लिखोगे तो गुजराती छापेगा, गुजराती लिखोगे तो पंजाबी छापेगा और पंजाबी लिखोगे तो भगवान ही मालिक है क्या छापेगा!
- आलोकभाई की गुगल से किट्टा हो गई है. अब वो लिखेंगे... "याहु पंजाबी में".
- प्रत्यक्षाजी कविता लिखना ही भुल गई है. सोचती रहती हैं क्या लिखुं ... क्या लिखुं... क्या लिखुं....
- देबुदा हिन्दी ब्लोगजगत छोड रहे है. अरे भाई एपल से ओफर आई है उन्हे. कौन छोडेगा. ह्म्म्म.... तो सबसे पहले वो कम्पनी का नाम ही बदलने की सोच रहे हैं... हिन्दी मे रखेंगे.... "सेब" स्लोगन होगा.... सेव योर मनी विथ सेब...!!! झक्कास.
- रजनीश मंगला भी ब्लोगजगत से टा-टा बाई बाई कर रहे है. अरे भाई.. जर्मनी मे राष्ट्रपति चुनाव जो लडने वाले है. जय हो!
- प्रतिक अब ब्लोग लिखने वाले हैं.. वाह वाह क्या बात है. अब वो टिप्पणीयाँ नही देंगे. बस दिन रात लिखेंगे. और खबरदार जो किसीने कोई टिप्पणी दी तो.
- मेहरा साहब को सलाम. शिष्ट हिन्दी कैसे लिखें उसपर ब्लोग शुरू करने वाले है. मेरा अभिमान!
- जितुजी... जितुजी को बचाओ कोई.... अरे साप्ताहिक जुगाड जुटाते जुटाते ऐसे उलझे हैं कि निकल ही नही रहे है. दिन रात जुगाड - जुगाड जपते रहते हैं... कोई है!!!!
- डॉ. सुनिल नेपाली हो गए. हाय राम..... किंग ज्ञानेन्द्र ने उनको अपना निजी चिकित्सक नियुक्त कर लिया. अब तो सिर्फ नेपाली मे लिखेंगे.
- उडन तस्तरी उड गई.... कहाँ ढुंढोगे... मिलेगी नही अब.
- फुरसतीया... खाली पीली.... युँही बैठे रह्ते थे ना. आ गए लपेटे में.. सरकार उठा ले गई.. रोजगार गेरेंटी कानुन में.. चलो काम करो अब...
- और मैं.... पंकज बेंगाणी. मुझे भी भूल जाइए.. वैसे भी अंट संट लिखता रहता था. चलो अच्छा है...मै तो ब्लोगर.कॉम का युजर-पासवर्ड ही भूल गया हुँ. अब सब बंद. कोई मंतव्य नही... कोई कैमेरा नही.... कोई पाठशाला नही.... बस हरी किर्तन करो अब!!
ये सब अप्रेल के फूल थे. क्या आप भी! कुछ भी पढते रहते हो!!

7 Comments:
पंकज भैया
आपके पहले सच से ही समझ गया था क्या माजरा है। नारद जी और हड़ताल हो ही नहीं सकता
पंकज
सही है पंकज भाई, लिखने का अंदाज़ तो आपका बढ़िया है ही, अब उसकी क्या तारीफ़ करूँ!! ;)
पर सच्चे दिल से कहूँ तो यह पोस्ट पढ़कर हँसी न आई!! ;)
"हँसी न आई!! ;)"
अप्रेल फूल बना रहे हो क्या? देबुदा को तो दौरा पङ गया था हँस हँस के.
वाह मजेदार रहा।
सबकी खबर रखते हैं आप।
उडन तश्तरी मे नया silencer फ़िट करवाया है, सुनाई नही देती मगर उड तो जोरों से रही है. लिखा तो आपने मज़ाक मे है, मगर कभी कभी सरस्वती बैठ जाती हैं ज़ुबान पर, ऎसा सुना था, काश कोई कोई सच निकले.आपको मिठाई खिलाई जायेगी. १ अप्रेल पर बुरा ना माने कोई.
अप्रेल फूल बना रहे हो क्या? देबुदा को तो दौरा पङ गया था हँस हँस के.
नहीं भाई, सही कहा था, देबू दा का तो कह नहीं सकता पर मुझे ये पोस्ट पढ़ हँसी नहीं आई!! :)
मै डर नहि गया क्यों कि नारद मुनि कैशे शांत बैठ सकते हैं
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