25.5.06

भ्रमण :: अहमदाबाद [1]

अहमदाबाद घुमना चाहेंगे, मैरे साथ. चलिए सैर करते हैं.. सिर्फ घुमेंगे नहीं, बहुत कुछ जानेंगे भी.

आज चलेंगे, सिद्दी सयैद जाली और वस्त्रापुर झील.


  • सिद्दी सयैद जाली:




यह जाली बहुत ही प्रसिद्ध है. यह जाली जिस मस्जीद में लगी है, उस मस्जीद को अहमदाबाद के सुल्तान ने अपने जीवन के आखिरी सालों में बनाया था. यह मस्जीद सन 1573 में बनी थी.

इसमें क्या खाश है? जरा नक्काशी को गौर से देखिए.. असम्भव सी लगती है ना!! यह जाली कितनी प्रसिद्ध है, इसका अन्दाजा इसीसे लगाया जा सकता है कि, आई. आई. एम अहमदाबाद, जैसी विश्वप्रसिद्ध संस्था का लोगो इसीपर आधारीत है.




  • वस्त्रापुर झील:




झील जैसी झील, इसमें खाश क्या? है ना! दो खाश बातें हैं. पहली तो यह कि इस झील से मेरा घर मात्र 200 मीटर दूर है.

दुसरी खाश बात... तीन साल पहले यहाँ बडी सी झोपडपट्टी बस्ती हुआ करती थी. बदबू इतनी की निकला ना जाए पास में से. आज यहाँ पाँच करोड की लागत से बनी (अहमदाबाद में निर्मीत और निर्माणाधीन कई झीलों में से एक) यह झील है.

यहाँ वॉक वे है, बच्चों के लिए खेल कुद के साधन हैं. एक नाट्य मंच है और हाँ प्रेमी प्रेमिकाओं के बैठने की जगह भी है.

वस्त्रापुर लेक में नर्मदा का पानी बहता है. नर्मदा नहर का पानी सभी झीलों में जोडा गया है. वैसे शहर के मध्य में से निकलने वाली साबरमती नदी में भी नर्मदा का पानी बहता है.

और वो झोपडपट्टी किधर गई. ना भाई ना.. मेरे सेक्युलर दोस्त ना घभराएँ. भाजपा की सरकार ने उन्हे घर से बेघर नही किया है. उनको पक्का मकान मिल गया है, दुसरी जगह.

अगली कडी में चलेंगे कांकरीया झील.

7 Comments:

Blogger Udan Tashtari said...

ये काम अच्छा शुरु किया आपने, पंकज भाई.यहां बैठे ही पूरा अहमदाबाद घूम लेंगे. बहुत बढियां.

समीर लाल

10:17 PM, May 25, 2006  
Blogger ई-छाया said...

बहुत सुन्दर। अरे भई खाश नही खास कहिये, कुद नही कूद। कुछ तो किया ही होगा भाजपा की सरकार ने, तभी तो वहॉ उनकी तूती बोलती है।
तस्वीरें तथा विवरण बहुत सुन्दर हैं।

12:48 AM, May 26, 2006  
Blogger उन्मुक्त said...

अहमदाबाद जाने का मौका मिला पर यह जाली नहीं देख सका था धन्यवाद

6:27 AM, May 26, 2006  
Blogger Sunil Deepak said...

जाली सचमुच बहुत सुंदर है.
साथ साथ, यह देखना कि शाम को जब बत्ती नहीं होती और तुम कम्प्यूटर पर काम नहीं कर सकते तो कहाँ जाते हो सैर करने भी अच्छा लगा.:-)
सुनील

10:20 AM, May 26, 2006  
Blogger पंकज बेंगाणी said...

सुनिलजी हमारे यहाँ अहमदाबाद में बत्ती जाती ही नहीं है. :-)
24 घंटे चालु ही रहती है.

फिर भी शाम को कभी कभी निकल तो पडते ही हैं... और कुछ नही तो वस्त्रापुर लेक ही सही.. आप भी आइए.


e-shadowभाई, त्रुटि के लिए क्षमा.

10:25 AM, May 26, 2006  
Blogger पंकज बेंगाणी said...

एक मज़ेदार बात बताना तो भूल ही गया. अभी परिचर्चा में आमिर खान और नर्मदा परियोजना को लेकर घमासान चल रहा है.

मै जोडना चाहता हुँ कि, वस्त्रापुर लेक में नर्मदा का पानी बहता है. नर्मदा नहर का पानी सभी झीलों में जोडा गया है. वैसे शहर के मध्य में से निकलने वाली साबरमती नदी में भी नर्मदा का पानी बहता है.

10:39 AM, May 26, 2006  
Blogger Manish Kumar said...

जाली की नक्काशी काफी सु्दर है । चित्र share करने का शुक्रिया ! झील की बगल से गुजरा था जब वहाँ गया था पता होता तो आपके घर भी हो आता

4:28 PM, May 26, 2006  

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